तुम ही हो
By Suruchi
तुम सूरज की रोशनी हो
तुम चाँद की चाँदनी हो
तुम सुरीले गाने का स्वर हो
तुम ही तो उसकी रागिनी हो
तुम ही सीने की आग हो
तुम ही आँख का पानी हो
तुम ही भोला बचपन
तुम ही सुलगती जवानी हो
तुम ही आने वाला वक्त
तुम ही दौर रवानी हो
मैं तुम्हारा दास हूँ
तुम ही तो मेरे दिल की रानी हो
तुम ही मेरी कविता हो
तुम ही मेरी कहानी हो
तुम ही घटा काली
तुम ही हवा सुहानी हो।
तुम ही प्यार में हुई नादानी हो
तुम खूबसूरती अफगानी हो
फूल भी तुमसे खुशबू मांगे
जब फ़िज़ा महकानी हो
तुम मेरे प्यार की निशानी हो
तुम ही खुदा नूरानी हो
तुम ही मोहब्बत में दीवानी
तुम ही इश्क़ रूहानी हो।
By Suruchi

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