“तुम कहती…”
By Tejash Burad
तुम कहती तो तुम्हारी बातों को अपने जज़्बातों से जोड़ लेता,
तुम कहती तो तुम्हारी ज़िद को अपने वादों से जोड़ लेता…
तुम कहती तो इन बेरुख़ी हवाओं का रुख़ मोड़ देता,
तुम कहती तो मैं अपनी बेफ़ज़ूल की ज़िद छोड़ देता…
मगर ना तुमने कभी आवाज़ दी ना मैंने अब तक कुछ कहा है,
फिर जितना भी था दर्द वो मैंने चुप रह कर तो ही सहा है…
वैसे कहने को तो बातें मेरे पास अब भी काफ़ी है,
मगर इन ग़लतियों की मेरे पास नहीं कोई माफ़ी है…
फिर माफ़ी किस बात की जब गलती का तुम्हें एहसास नहीं,
और ऐसा झूटा रिश्ता भी मुझे आता कभी रास नहीं…
By Tejash Burad

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