तुम उतरे मन के सागर में
By Kusum Sanju
तुम उतरे मन के सागर में
जीवन का परिचय बन कर
मेरा बूँद-बूँद तुझमें मिलना
मुझ में मेरा कुछ न रहना
तुझ में मिलना बस खो जाना
तेरा मेरी दुनिया हो जाना
वो कई फ़साने याद आये
दिन वही पुराने याद आये
अब न तुम हो और न ही मैं
दुनिया भी टूटी, बिखरी
टूटे सपनो की आंधी में
जीवन ओझिल,
पलकें बोझिल
तुम आंसू बन कर छलक गए
आँखों के सूने कोनों से
गुम सुम सी शाम
चुपचाप सा दिल
पल कई सुहाने याद आए
दिन वही पुराने याद आए।
By Kusum Sanju

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