तुझे क्या कहूं
Updated: Dec 2, 2022
By Prashant Lodaya
तुझे अनुरक्ति कहुँ या अनुराग
गीत कोई भी सुनाऊँ गीत में होती है तू
तुझसे कुछ कहना शेष कहाँ है
सोचूं कुछ उसके पूर्व ही समझ जाती है तू
तुझे चित्र कहूं या चित्रकार
रंग भरता हूँ मैं और रंग जाती है तू
मुझे दोष दूँ या तुझे कहूं दोषी
मेरी हर भूल को भूल जाती है तू
तुझे साहस कहूं या प्रेरणा
मेरी हर उड़ान का प्राण है तू
तुझे कथा कहूं या कविता
स्वप्न मेरे होते हैं और जागती है तू
तुझे पत्नी कहूं या सखी
हर नाता बड़े चाव से निभाती है तू
By Prashant Lodaya

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