तुझे कोई शरम नही
By Nisarg Shah
तुझे कोई शरम नही,
तेरा कोई धरम नही।
तेरी कुत्ते की तो जात है,
सबसे निचली औकात है।
तेरा यह गलत भ्रम है की,
लड़कीयाँ मन से नरम है।
शुकर मना की वो तमीज़ में है,
चहरा आईने में देख ,लिखा तो बदतमीज़ है।
संभाल कर उनसे बर्ताव कर,
हमारे देश की वो शान है।
संभाल कर, तू डूबती हुई नाव है,
तेरी औकात से कई गुना उनका मान-सम्मान है।
तू पढ़ा हो या न हो फरक नही पड़ता,
तू उनका सम्मान कर रास्ते में नरक नही पड़ता।
तू पढ़ा हो या न हो फरक नही पड़ता,
उनका सम्मान करना तो Life के Syllabus में ज़रूर है पड़ता।
मेरा तुझे अपमान करना,
यह मेरा Motive नही,
तुझमे ईमान है तो समझ ले,
की तेरा सही Initiative नही।
मुझे पता है कि तु बदलने नही वाला,
तू वैसा का वैसा रहेगा जितना भी तू हो काला।
मेरा यह प्यारा सा निवेदन है,
सोना तो कुछ नही, मान-सम्मान असली धन है।
By Nisarg Shah

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