तालमेल
Updated: Dec 2, 2022
By Monica Banerjee
एक लम्बा फ़ासला है
घर के आँगन से गली के चौबारे तक
राही होने तक तो ठीक है
परेशानी सही राह चुनने की है
चौबारे के चहुँ ओर, कई राहें हैं बाहें फैलाए
कुछ ठहराव की ओर लिए जाएँ
कुछ गतिमान रहने के लिए प्रेरित करें
कुछ कहें औरों के लिए ही जियो
कुछ कहें कभी अपने मन की भी करो
घर बाहर की ज़िंदगी
एक ही बेल की उलझी लटें हैं,
एक को छोड़ दूसरे को महत्व देना
एक ख़तरनाक खेल ना साबित हो
पर फिर यह ‘तालमेल’ जो शब्द है
बड़ा ही फिसलन भरा है
यह कोई ठोस आकार नहीं ले पाता
राह क्या, राही क्या!!
By Monica Banerjee

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