तस्वीरें
By Sonal Mathur
तस्वीरें आइना नहीं होती साहेब,
मेहेज़ बीते दिनों की बंद कॉपी है।
यह बोलती नहीं हैँ, पर बता जाती है,
छुपे कई राज़, सफर की साथी है।
कुछ लोग धुंधले से हो गए हैं,
कुछ समय की मोटी परत में छुप गए हैँ।
साँसें अभी बाकी हैँ तस्वीरों की,
जोड़े तो जुड़ जाती हैँ लड़ी यादों की।
खोलकर तस्वीरें फिर बैठ जाते हैँ,
किस्से-कहानियों में फिर खो जाते हैँ।
तकदीर जोड़ती होंगी यह तस्वीरें,
दिल से दिल को ढूंढ़ती होंगी यह तस्वीरें।
मिलने की तभी तो वजह बनती होंगी,
हमसफर चुनने की तरफ बढ़ती होंगी।
गुज़र जाएगा यह भी समय तस्वीर बनके,
नज़र आएगा यह वक़्त बीती बात लेके।
खींच ले तस्वीरें, चंद वक़्त जोड़ लें,
क्या पता इनके लिए कल हम भी तरसें।
खुशी के पल संजोया करते हैँ,
तस्वीरों के ज़रिए जीया करते हैँ।
दोहरा देती है ज़िंदगी को यूं हीं,
धारा लौटती हो जैसे तट पर अधूरी।
पहले तस्वीरें बेरंग हुआ करती थीं,
अब रंगीन दुनिया में लोग बेरंग से लगते हैँ।
मजमा जम जाता था तस्वीर लेने की होड़ में,
अब अकेले में सेल्फी से काम चलने लगे हैँ।
ज़रूरी है अक्सर तस्वीरें लेना भी,
चूँकी कैद करने पल भी जरूरी है।।
By Sonal Mathur

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