तलाशी
By Laxmi Kumari
मैने अपने अंदर तलाशी ली
हर दराज को खोला
हर उस मखमली कपड़े को
खोल खोल देखा
जिसमें कुछ भी कीमती
मिल सकता था
कहीं जा
किसी दराज के अंतिम छोर पर
मुझे प्रेम मिला
वो प्रेम जिसमें सिर्फ तुम हो
मेरे पास इसके सिवा कुछ नहीं
जो मैं तुम्हें दे सकूं
इस दुनिया से विदा लेने से पहले
स्वीकार कर लेना
प्रेमिका न सही
जोगनिया समझ ही ..लक्ष्मी
By Laxmi Kumari

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