तमन्ना चाँद की करते।
By Surya Kant Pawar
अमावस रात के बिखरे ,
लेकिन उल्हाना चाँद पे रखते।
यादों की धूप के सिक्के,
लेकिन मुनव्वल चाँद की करते।
अपना दिन ढूँढ़ते हर सहर में ,
लेकिन तहक़ीक़ चाँद की रखते।
चाँद छुपा चकोर से अपने ,
अंगारों को चुगते, पर तमन्ना चाँद की करते।
By Surya Kant Pawar

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