तब से अब तक का सफर
By Magan Chawla
ये ज़िन्दगी ने अब तक मुझे
बहुत कुछ सिखाया है,
कैसा था ये सफर मेरा
सोच के मन घबराया है,
सोचूं गर ध्यान से मै
ये ज़िन्दगी में अब तक मैंने
बहुत कुछ गवाया है,
सोचा नहीं था कभी पहले
कुछ ना पाकर भी
सब कुछ मैंने पाया है,
इंसान ने खुद से इंसानियत का
गहरा राज छुपाया है,
इंसान बनाया रब ने सबको
इसी में सब कुछ आया है,
क्या मांगता था उस रब्ब से मै
क्या ही मै लाया था,
जब आया था इस संसार में
ये भी मुझे पराया था,
भुलाकर उस रब को मैंने
इस दुनिया को अपनाया था,
पता नहीं था उस वक़्त मुझे
मैंने अपना ही मान घटाया था,
बेखबर था इन भुलो से मैं
अनजान था उसके असूलो से मैं
मांगता था उस रब से
इस संसार को,
शायद भूल गया था
उसके प्यार को,
बस बैठा अब यही विचार कर रहा हूं
कैसा था ये सफ़र मेरा
क्या थी ये ज़िन्दगी मेरी
ना सब्र था ना हीं बंदगी तेरी
जब किरपा की तूने मुझ पर
ज़िन्दगी को सवार दिया,
काबिल नहीं था इतना मै
जितना तूने प्यार दिया,
हां शायद ,
अब तो उस रब से ही
रब को पाने का प्रयास कर रहा हूं,
जी रहा हूं उसके नाम अब मै
बस मंज़िल तक पहुंचने की आस कर रहा हूं ,
उसी को अब पाना है
उसी से अब निभाना है ये सफर ज़िन्दगी का
बस यही सोच कर रास्ता तय कर रहा हूं,
मेरे मुर्शीद,
ना भटकूं अब राहों से साथ देना तुम
बस कब पहुंचता हूं
इंतज़ार कर रहा हूं।।
By Magan Chawla

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