तन्हाई
By Roshni Jain
कितनी अजीब सी होती है ये,
क्योंकि दिल की हर बात से वाकिफ हो जैसे,
खुशियों भरे पल बस इसी वक्त याद आते है,
जब कोई न हो पास और सारे छोड़ जाते है,
हमें मुश्किलों का सामना करना सिखलाती है,
आने वाली कठिनाइयों को दिखलाती है,
हम रोए या हसे इसे कोई फर्क नहीं पड़ता,
दिल में दर्द तो चुबता है ये सोचकर और भी डसता,
हर घड़ी, हर वक्त है सबके साथ रहना इसे,
न सबूत न गवाह देना है किसे,
उसे पता है कि हमे उसका साथ जिंदगी भर निभाना है,
थाम लो उसका हाथ क्योंकि सफर तुम्हें सुहाना बनाना है, जितना भागोगे इससे उतना ही पास चली आऐगी,
न चाहते हुए भी हर तरफ वही छाऐगी,
तन्हा हो तुम तन्हा ही रह जाओगे,
खुद को कभी इस बात के लिए माफ न कर पाओगे,
जिन्दगी ऐसे जियों की तुम जैसा कोई शक्स न हो,
पाकर तुम्हें सबको डर रहे कि तुम्हे न खोना हो,
कितना मुश्किल होता है तन्हाई के साथ जीना,
उनसे पुछो जो वतन के लिए तानकर चल रहे है अपना सीना, याद तो सबको सभी की आती होगी,
तन्हाई तो ऐसी चीज़ है जो बड़े बड़ो को तो क्या बच्चों को भी सताती होगी,
खुश रहो उनके साथ जो तुम्हें खुश रखें,
वरना एक दिन ऐसा आयेगा जब होंगे सारे तुमसे परे,
फिर मत कहना कोई मेरे साथ नही,
छोड़ गए सारे रह गयी मैं और मेरी तन्हाई।
By Roshni Jain

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