तन्हा
By Rajat Bhadoria
जीने को जहाँ भी कम मरने को कुछ गज़ लगते हैं,
ज़िन्दगी तेरे तौर तरीके बड़े अजब गज़ब लगते हैं!
शहरों में ये कैसा शोर और दिलों में चीखते सन्नाटे,
गमगीन आँखों पे हस्ते हुए चेहरों के पहरे लगते है!
दिल की बातें करते हैं सब समझता पर कोई नहीं,
मुनाफे के सौदों पर अब रिश्तों के नकाब लगते हैं!
बस आ सको हम में मिल जाने के लिए तो आओ,
इस भीड़ में अब हम कुछ तन्हा-तन्हा से लगते हैं!
By Rajat Bhadoria

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