तन्हा
By Dr.Trupti Upadhyay
मुस्कुराते हुए देखना चाहते थे तुम हमेशा,
अब हम हद से ज्यादा रोया करते हे ।
बाते करे तुमसे हम रातो से भी लंबी,
अब हम खामोश रहा करते हैं ।
साथ रहे हमेशा तू ये ही थी ख्वाइश तुम्हारी,
अब हम तन्हा चला करते हैं ।
कोई ना देखे तेरे सिवा इस चहेरे को ये जिद थी तुम्हारी,
अब हम नकाब में हि रहा करते हैं ।
खुल के जीये हम ये चाह थी तेरी,
अब हम मायुशी में जिया करते हैं ।
समजा तो तब भी नहीं पाए तुजे, करते थे कितनी मोहब्ब्त,
समज तो अब भी नहीं पाओगे,
समज ले एकदूजे को इस चाह में बस,
अब हम खुद को समझाये जाते है ।।
By Dr.Trupti Upadhyay

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