डॉक्टर्स
By Poonam Kumari
तुम्हें क्या लगा की सिर्फ तुम्हारा ही दिल और दिमाग अलग अलग सोचते हैं
उनके तो दोनों ही उन्हें हर दिन एक नई उलझन में डालते हैं
दिमाग सोचता है की हाँ उस मरीज़ के लिए ये इलाज़ सही रहेगा
पर दिल सोचता है की अगर कोई दिक्कत हुई तो उसका परिवार उसके बिना कैसे रहेगा
दिमाग सोचता है की बस थोड़े दिन और बचा लो उस मरीज़ को किसी तरह
पर दिल सोचता है की क्या वो जी भी पाएगा सही से इस तरह
दिमाग सोचता है की उस मरीज़ की वो सर्जरी कर दो बस ताकि वो ज़िंदगी जीए
पर दिल सोचता है की कैसे वो अपने सपनों और ख्वाइशों के बिना जीए
दिमाग सोचता है की बस अपनी ड्यूटी सही से करो
पर दिल सोचता है की इंसानियत के लिए भी तो कुछ करो
दिमाग सोचता है की आज किसी मरीज़ को खोया तो अगले पर ध्यान दूँ
पर दिल सोचता है कैसे उससे बने नाते को भुला दूँ
डॉक्टर का दिल और दिमाग हर दिन ही लड़ता है
पर फिर भी वो हर किसी को बचाने के लिए अड़ा खड़ा रहता है
आइए आज डॉक्टर्स डे पर
उन सभी डॉक्टर्स को धन्यवाद दें
जिन्होंने किसी ना किसी मोड़ पर
कभी न कभी हमें खोने से बचाया
चाहे दुनिया में खोने से या अपने आप में खोने से
By Poonam Kumari

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