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ठहराव

May 6, 2023
1 min read

Updated: Jun 2, 2023

By Ananya Joni



समंदर में ठहरे गहरे पानी की तरह हूँ मैं। हवा के साथ बहके किनारों तक बस जाकर लौटना नहीं है। मेरी खटास से तुम अमृत तो नहीं पर स्वाद लूटोगे। सूर्य के क्षितिज को मेरे अंदर घुलते देख सुकून पाओगे। एक जगह ठहरने से मेरी ताकत और बढ़ेगी... सारे दुःख हरण कर अपने अंदर समेटूंगी। समय आने पर तूफान समेत लौटाऊंगी। गहराई में गोते मार क्या ढूँढोगे... बस सनकी जुनून ही तो पाओगे। नदियाँ बेवजह ज़िद्द करती रहती है... समंदर में बस जाने का ख्वाब रखती है।


अब उसे कौन समझाए कि... समंदर कभी किसी का सगा नहीं। मुझे तो बस सभी नदियों के अंश पाल कर ही बसेरा करना है। बेमतलब बवाल करती रहती हूँ। हर नफरत को यूँ ही निगल लेती हूँ। चाँदनी रात की हसीन चादर ओढ़ती हूँ। मेरे ठहराव की शांत गहराई बहुत गहरी है। मेरा स्वभाव तो बेहद तनहाई से भरी है। मीलों तक फैली हूँ पर मेरे कण चूर अधूरी सी है। फिर भी मुझे बहाव से भी ठहराव बहुत प्यारी है।


By Ananya Joni




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