ठहराव
By Arjun Singh Negi
न महंगे बंगले की ख्वाइश न आलीशान मकान चाहिए
एक चादर ही काफी है ओढ़ने को, न मुझे मखमल की दुकान चाहिए
नींद के लिए कुछ नहीं माँ, बस तेरे आँचल की छांव चाहिए
जीवन में कुछ नहीं बस ठहराव चाहिए!
न ऊंची ऊंची इमारतों में सुकून है, न लम्बी लम्बी गाड़ियां का जुनून है
न चाहिए AC की हवा , बस पीपल के पेड की ठंडी छांव चाहिए
शहर की भागदौड से दूर मुझे मेरा प्यारा गाँव चाहिए
जीवन में कुछ नहीं बस ठहराव चाहिए!
ना Tinder पर match ना right swipe चाहिए
हज़ार हसीन चेहरों में बस कोई अपना type चाहिए
मेरी नींद मेरा चैन सब चीन ले, वह इश्क़ वाला मीठा मीठा घाव चाहिए
जीवन में कुछ नहीं बस ठहराव चाहिए !
न Insta पर followers न Facebook पर like चाहिए
सोचता हो अपने जैसा वो Dirty Mind चाहिए
हम तो खुश हैं दोस्तों की गालियो में, न किसी से कोई झूठे लगाव चाहिए
जीवन में कुछ नहीं बस ठहराव चाहिए!
By Arjun Singh Negi

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