ठहराव
By Nikhil
ठहरा पानी हूँ, पीछे जाना नहीं चाहता आगे बह नहीं पारहा, एक नज़र देखने रुका था पर अब बहने की क्षमता ही खो बैठा हूँ.. डर लग्ता है की दलदल न बनजाउ , अपने भीतर समाकर शीतलता देने का इरादा था ... कही कब्र ही ना बनजाउ | सोचता हूँ की एक मगरमच्छ पाल लू ...
कोई साथ नहीं होगा और फ़िर कोई आघात नहीं होगा | आने वाली लेहेर के साथ बेह्जाने का इरादा है, एक दूरी से मुस्कुराता रहूंगा, तुम कभी नज़दीक से गुज़र जाना और जब तुम इस किनारे पर टहलने आना... मै पाँव को छू कर पीछे हट जाऊँगा, मुस्कुरा मत देना, मै बह नहीं पाऊंगा , . . एक बार फ़िर से ठहर जाऊँगा ||.
By Nikhil

Comments