ठहरा वक्त!
By Sabiha Mohammed (Shadan)
आज लगता गुज़रता वक्त ठहरा है...
आज इन सूनी आँखों में, इंतज़ार तेरा है ।।
मुस्कुराहटें धुंधली सी हो गई।
ढूंढती हूं खुद में जो, अक्स तेरा है ।।
सुलगना है छुवन से तेरी!
आज समुंदर सा दिल भी, सेहरा है ।
सब कहते है खो गया है तू...
मेरा दिल जानता है, तू आज भी मेरा है ।।
पहेली तेरी मेरी कहानी ।
इस सोच पर आज भी तेरा ही पहरा है ।।
आज लगता गुज़रता वक्त, कुछ इस तरह ठहरा है...
आज इस सीने में दर्द बहुत गहरा है ।।
By Sabiha Mohammed (Shadan)

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