टेसू के राग
By Karuna Puran
टेसू से मिले फाग
भूले मानस द्वेष-राग
ढल चली बिरह की बेला
लगा मिलन की खुशियों का मेला
खिलते पलाश, लाये बसन्त-बहार
पतझड़ बाद, प्रकृति ने लिया खुद को सँवार
हर्षाया मन पुलकित है
रोम-रोम उत्साहित है
पेड़ों पर लदे मनमोहक ढाक
कानन छटा अँगड़ाई ले जाग
जीवनदायिनी जँगल की आग
रोग दुःख क्लेष दूर करे
हर ले अवसाद मन में प्राण भरे
जग में प्रेम, सौहार्द्य, सद्भाव की आस
जुग-जुग तू जीवे पलाश
जुग-जुग तू जीवे पलाश ।।
By Karuna Puran

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