टूटे पत्ते
By Deeksha Chugh Bagla
टूटे पत्ते जो छूट चुके उस हरे-भरे वृक्ष से
कहते तो होंगे कुछ
के बरसों तेरी टहनी ने
मुझे कुछ संजो कर सा रखा था
एक मां के जैसे भूखा होने ही नहीं दिया
अब जब गुजर चुका हूं मैं
कुछ अफसोस तो हुआ होगा
लेकिन तुम फिक्र मत करना
परिवर्तन का नियम बदलते मौसम के साथ
कुछ नई सी जिंदगी दे जाएगा
एक हरियाली सी के साथ
क्योंकि समय हमेशा एक सा नहीं रहता
फिर से खिलखिलायेगा तू
एक नए रुत में भरी जवानी की तरह
एक नए एहसास के साथ।
By Deeksha Chugh Bagla

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