झूठी बातें…बेबुनियाद वादें…
Updated: Jun 9, 2023
By Tejash Burad
कहा है की…
अल्फ़ाज़ों से जो कह सकें मेरे मन में ऐसी बात कहाँ…
इन लफ़्ज़ों से जो बह सकें ऐसे भी मेरे जज़्बात कहाँ…
फिर हम ख़ुद को ना जाने क्यों किस बात की सज़ा दे रहें हैं…
और गुनाह कर के तो गुनहगार ही यहाँ मज़ा ले रहें हैं…
वो कहते हैं ज़रा सा भटक गए थे मगर हाँ कहीं खोए नहीं…
कैसे समझाएँ उनकी वजह से हम कितनी रातों से सोए नहीं…
मगर अफ़सोस इस बात का नहीं की उन्हें गलती का एहसास नहीं..
भला हमें कैसे गवारा हो हमारे अलावा उन्हें कोई और ख़ास यहीं…
फिर मेरे ख़िलाफ़ बातें और मेरी बुराई चाहे दस कर लेना तुम…
मगर सच से भी वाक़िफ़ हो तो ज़रा सी शर्म बस कर लेना तुम…
फिर सच क्या था ये कभी किसी से कहने मैं नहीं जाऊँगा…
मगर तुमने जो किया है उसको कभी अपना भी नहीं पाऊँगा…
By Tejash Burad

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