ज्ञान का दहशत
Updated: Aug 28, 2025
By Mandira Palit
यह कैसी होड़ है, चहुँ ओर ये कैसा शोर?
यह अंधकार की छाया सी क्यों बढ़ रही मानवता की ओर?
वो विशाल आकृति आपने दहशत, आतंक, अशांति, युद्ध रूपी
पंजो को क्यों फैला रही इस ओर?
उसके रक्त रंजीत आँखों में यह कैसी प्रतिहिंसा की ज्वाला?
हे मनुष्य जाति के पिता, तुमने ज्ञान रूपी फल को पाकर
यह कैसा ज्ञान पिपासा अपने संतानों में जगाया?
जो ज्ञान के ही खोज में, आविष्कार और अनुसन्धान के दौर में,
आपने ही हाथों, आपने संहार का कारण बन गया।
कभी संतुष्ठ न होने वाली इच्छा शक्ति, और-और-और की लालसा,
मनुष्य को पंगु ही नहीं, एक छोटे से बटन का दास बनाया।
कंप्यूटर, यांत्रिक मानव, टेस्ट ट्यूब बेबी ही नहीं,
यह मनुष्य के मस्तिष्क को अणुबम, मिसाइल्स,
और स्टार वॉर के लिए भी उकसाया।
यह अपने ही विनाशकारी प्रयत्न को हिरोशिमा एवं नागासाकी
के प्रलय के रूप में सार्थक होते देखा।
कब तक चलेगा ये पागलपन?
क्या हमेशा मिलेगी गाँधी को गोली और ईशा को सूली?
हे मानवपुत्र, अगर नाज़ है इतना तुम्हे अपने ज्ञान का
क्यों नहीं खोजते एक रास्ता मानवता के उत्थान का?
By Mandira Palit

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