जीवन है अनमोल
By Veena Agrawal
इतना अनमोल जीवन पाकर,
इसे यूँ माटी में क्यूं मिलाता है।
कैसा तूफान या लहर आती है,
जो जीवन की कश्ती ही डूबा जाती है।
विपदा कैसी आती है?
जीवन कठिन, मौत सरल हो जाती है।
आशा वो कौन सी, सपने वो कौन से बुनता है,
जो सबकी उम्मीदें पीछे छूट जाती है।
डर कौनसा सताता है?
मन हार, वो मौत को गले लगाता है।
आंधी या बाढ़ कौनसी आती है,
जो जीवन की बगिया बहा ले जाती है।
क्यूं निर्बल हो मुक्त हो जाता है?
अपनो को लाचार असहाय कर जाता है।
क्या पाया नही जो, वही कीमती था?
जिंदगी कौनसा मुकाम चाहती है,
खुशियां और शोहरत को छोड़ मौत अपनाती है|
मानवता का आदर्श तो तप कर ही बनता है,
मनोबल को कर ऊँचा, जीत हर जंग जीवन की।
क्यूं कमज़ोर हुआ जाता है।
महान वही बनता है, मिशाल वही बनता है।
जो मौत को नही जिंदगी को गले लगाता है।।
By Veena Agrawal

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