जीवन सार
By Praveen Kumar Das
विधिवत का सार यही है,
नैतिकता से उद्धार यही है,
प्रेम प्रतिष्ठा और सम्मान,
किसी श्रेष्ठ का घरबार यही है l
प्रेम न हो, केवल धन का मोही
धरती पर सबसे लाचार वही है,
प्रेम प्रतिष्ठा और सम्मान,
किसी श्रेष्ठ का घरबार यही है l
मनु के मन को कौन बताए
सफलता का व्यवहार यही है,
प्रेम प्रतिष्ठा और सम्मान,
किसी श्रेष्ठ का घरबार यही है l
शीतल मन, तीव्र मति का धारक
विशाल ॐ आकार वही है,
प्रेम प्रतिष्ठा और सम्मान,
किसीश्रेष्ठकाघरबारयहीहै l
By Praveen Kumar Das

Comments