जीवन-सरिता
By Shweta Khati
जीवन की इस सरिता में,
निर्मल धारा रहे अमर
ज्ञान की प्यास बुझाने को
बहता जाए कल-कल निर्झर ।
नौका कौन सहज हो पार,
जो ज्ञान की गंगा तर जाए ।
साधन ऐसा क्या होगा साधक,
जो करे जतन कि मिल जाए ।।
रहे अथक प्रयास फिर
ज्ञान की राह में बढ़ने को
हो प्रयास हर सच्चा
उस परमज्योति से मिलने को ।
कृपावान जो हो जगदीश,
हर राह बहुत आसां होगी ।
भ्रमित दिशाओं में न फिर
यूँ कोई नाव सहज होगी।।
By Shweta Khati

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