जीवन ज्योति
Updated: Aug 2, 2025
By Anubha Sinha
बढ़ चल अब नए उपवन में
उम्मीद का ज्योत जला कर
कभी रुके जो कदम तुम्हारे
भर जाए यदि आँसू से प्याले
तब डट कर सपनों से लड़ना
डर कर मत जीवन को खोना
यदि सुबह का संसार नहीं
वक्त भी तेरे साथ नहीं
पर चलना है उस राह पर
जहाँ जीत का शंखनाद है
बना मिट्टी से ये जीवन अपना
मिट्टी से ही धूल जाना है
पर जब तक जीना है जीवन
राहों पर चलना है हर दम
चलता है चाँद अकेले ही
रातों के अंधकार में
उगता है सूर्य अकेला ही
सुबह की हुंकार पर
मन हारे तो रह जाओगे
साथी तुम किसी राह पर
मन जीते तो बस जाओगे
ध्रुव तारा बन कर इस ब्रह्माण्ड
By Anubha Sinha

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