जीवन की आपाधापी में
By Anjan Sharma
जीवन की आपा धापी में,
केवल विजय हम चाहते हैं।
हर क्षण, दिवस, हर पल में हो,
अपनी ही जय हम चाहते हैं।
पर हमारी भूल है कि वक्त की सुनते नहीं,
भाग्य को लेकर बराबर ख्वाब हम बुनते नहीं।
भावी कल भी चाहते हैं हम हमारी कैद में,
कोई कोताही नहीं सहते हम अपनी ज़ैद में।
पर समय के चक्र को हम करते हैं अनदेखा,
पार करते हैं सदा अपनी वो सीमा रेखा।
इस भ्रम के माया जाल में,
देखें स्वप्न हम कल "मैं-ही-मैं" की,
भूल जाते हैं की हम हैं,
कैद में इस दृढ़ समय की।
By Anjan Sharma

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