जीना इसी का नाम है
Updated: Sep 16, 2025
By Anita Singh
जीना नहीं बस में, मरना भी नहीं बस में, जीना है मजबूरी !! और निभानी हैं सारी रस्में, सोचा ही नहीं था कभी,ऐसा भी वक्त आएगा, आसूं छुपाकर आंखों में,लब ये मुस्कराएगा। रोना भी अगर चाहूं तो !! आंसू छुपाने होंगे, आवरण चढ़ा कर चेहरे पर,दुनियां को दिखाने होंगे। तनहाई का है आलम, कैसे ये गुजर पाएगा, आंसू छुपाकर आंखों में,लब ये मुस्कराएग। जबसे हुए हैं हम जुदा,जीया ही कहां हमने, निभा रहे हैं हम !! तुमसे ली थी जो सारी कसमें, सोचा नहीं था हमने !! मंजर ये बदल जाएगा, आंसू छुपाकर आंखों में, लब ये मुस्कराएगा।
By Anita Singh

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