जीत की जंग
Updated: Sep 20, 2022
By Khyati Vipul Kapadia
दुनिया का दस्तूर मुझे समझ न आता,
जब एक है हारता, तभी दूसरा जीत का जश्न मना पाता.
जीत की भी अपनी ही है परभाषा,
कोइ दौलत से तो कोइ प्यार से है जीत तोलता.
एक झूठ से कोइ विश्वास हार जाता,
एक सच से कोइ दिल जीत लेता.
किसीको जीतना तो ज़िद कहलाये,
किसी के लिए सब हारना, यही प्यार दिखलाये.
हार का डर जीत दिलाता, जीत का घमंड हार दिखाता,
पर जो हार कर भी ना रुका, वही ज़िन्दगी जीता.
जिसने ना चखी कड़वी हार, वो क्या जाने जीत की मिठास,
जब हारोगे "जीत की " जंग, तब जीत आएगी खुद तुम्हारे पास.
By Khyati Vipul Kapadia

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