जिन्दगी
By Rashmi Mahish
जिन्दगी एक पहेली है जिसमें हर कोई है फस जाता
उलझने ऐसी है जिसे न कोई सुलझा पाता
न खुशी और न गम जाने कौन सा एहसास ये दे जाता
मुरझाई हुई चेहरे पे पर मुस्कान है ये ले आता
छोटे छोटे पल को समेटना इसे है आता
बिखरी हुई बस्ती में खुशियाँ भर भर कर ये लता
मुशिबतों से इसका बड़ा अच्छा है नाता
अँधेरा मिटा कर सबके आँगन में खुशियों के दीप ये जलाता
ये वो लहर है जिसे शाहिल हर पल है बुलाता
खुशबू इसकी ऐसी जो सबके मन है लुभाता
कभी सुख कभी दुख पर आगे सदा है ये बढ़ाता
मिल जाये यदि अपनों का प्यार फिर खुशियों का फूल है ये बरसाता
By Rashmi Mahish

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