जिंदा नहीं हुँ
By Vibha Singh
तुमसे बिछङ के जी तो रहा हुँ,
रूह मेरी पर जिंदा नहीं है,
आवारा हवा में उङता हुँ दिन भर,
सीने में अब वो पंरिदा नहीं है,
बहुत कुछ था बिखरा,
सिमट तो गया पर, धङकता था दिल जो जिंदा नहीं है ।
तो क्या हुआ मुसकुराता हुँ अब भी,
तुझे याद कर गुनगुनाता हुँ अब भी,
बीते वो लम्हे भुला तो रहा हुँ,
भूलूंगा लेकिन ये वादा नहीं है,
बातें तुम्हारी मानी है मैने,
ना रोने कहा था रोया नहीं हुँ,
भींगा हुआ मन, सूखी सी आखें,
बरसना तो चाहें, पर बरसी नहीं हैं,
बहुत कुछ था बिखरा, सिमट तो गया पर ,धङकता था दिल जो जिंदा नहीं है ।
दुआएं मेरी सब तुमपे फिदा हों,
जहाँ तुम रहो बस खुशियाँ वहाँ हों,
मेरा क्या है,
मै तो तुमपे था मरता,
तुमपे मर रहा हुँ ,
तुमसे बिछङ के जी तो रहा हुँ,
रूह मेरी पर जिंदा नहीं है ।
By Vibha Singh

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