जिंदगी एक नाँव है
By Vivek Chandel
जिंदगी एक नाँव है
कभी ठहराव है, तो कभी तेज बहाव है
काल की समंदर में गोते लगाती
हमेशा आगे बढ़ते जाती
जिस धारा में बह चुकी
दुबारा न लौट सकती
आगे न जाने कौन सी लहर है
पर वो कहर आज का ही असर है
समय के साथ जीने में ही भलाई है
अन्यथा,
न जाने कहाँ नाँव
और कहाँ उसकी चप्पू बहाई है ।
By Vivek Chandel

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