जामुनी रंग
By Swati Sudha
जब मेरी आंख खुली,
पाया खुद को ऐसे घर में,
जहां हर कोई मुझे देख स्तब्ध था,
नजरों में करूणा, तो कभी उपहास था ।
माता और भाई थे श्वेत वर्ण ,
पिता का वर्ण था श्याम ,
और मुझे कहा गया जामुनी,
शुरू में जामुनी रंग की उपमा लगी भली,
और जब असलियत पता चली,
तो जामुनों से दोस्ती हो चली।
मेरे ब्याह के नाम से हमेशा मैंने माता पिता को सहमते देखा,
तो फिर मेरा मन कैसे ब्याह के नाम से पुलकित होता,
पहले तो बार बार अग्निपरीक्षा देनी पड़ी,
अपने जामुनी रंग के उपर सफेदी लगानी पड़ी,
बहुतो के ठुकराने पर एक नए मुझे स्वीकारा,
पता चला बाद में, उसने जामुनी रंग की जगह लक्ष्मी को स्वीकारा ।
पर मेरी तो जामुनी रंग के साथ दोस्ती थी पक्की,
तो भला मैं जामुनी रंग का अपमान कैसे सहती,
बचपन की दोस्ती आज भी निभा रही हूं,
अपने जामुनी रंग के साथ अकेले दुनिया निहार रही हूँ ।।
By Swati Sudha

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