जहां तक चलूं
Updated: Sep 16, 2025
By Yakshita Gawan
जहां तक चलूं....
बस तेरी ही आहटे हो
उन आहटो में बस तेरी ही मुस्कुराहटे हो
उन मुस्कुराहटो में एक ऐसी राहत है
जिसकी हर किसी को एक अरसे से चाहत है
जहां तक चलूं ....
तेरी यादों के साथ
जैसे हो तुम्हारे हाथों में हाथ
बस चलती जाऊं
और कभी वापस ना आऊं.
जहां तक चलूं ....
बस तुझमें ही मंजिल नजर आती है
जो मुझे एक कभी खत्म न होने वाले ,
सफर का अहसास कराती हैं
जहां तक चलूं....
बस तेरा ख्याल साथ हो
और एक प्यारी सी मुलाकात हो
और हम हमेशा न साथ होते हुए भी साथ हो
जहां तक चलूं....
राह में कितनी भी चुनौतियां आए
चाहे खुदा खुद धरती पर आ जाए
फिर भी बस चलते जाना है
और हमसे जुड़ी हर मंजिल को ,
पूरी शिद्दत के साथ पाना है
By Yakshita Gawan

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