जलरानी
By Shashank Kumar Sinha
चम, चम, चम, चम
धम, धन, थम, धम
इठला कर बिजली कहीं छुप जाती है |
काले बादल के पीछे से,
झांक कर फिर मुस्काती है |
पल भर में इस बादल से उस बादल
उड़ कर चली जाती हो,
क्या तुम हम से लुका छुपी खेलना चाहती हो ?
पर नियम बता दूँ तुमको,
तुम मुझे धप्पा मत देना
मैं हर बार तुम्हें ढूंढूगा
तुम मुझे ढूंढने मत आना |
यह तो बताओ,
क्या धरती पर बारिश देखने
तुम बादलों से बाहर आती हो ?
अरी यह बता
फूलोँ से टकराती बूंदें,
कैसा लगता है तुझे ?
सोजन के पत्तों का नृत्य देख,
कैसा लगता है तुझे,
पोखरो में उठती कोलाहल बूँदों की
कैसा लगता है तुझे ?
क्या मेरी तरह तुझे भी
यह सारी क्रीड़ा खुबसूरत दिखती है ?
अगर हाँ !
तो तू भी मेरे तरह पहल है |
क्या खूबसूरत नजर आ सकता है ?
तुमने कभी किसी से प्यार किया है ?
वो गर्जना क्या तुम्हारी विरह की कराह है
या अपने प्रेमी को चिल्लाती हो ?
यह जो इठलाती हुई,
धरती पर उतर जाती हो,
क्या तुम भी उर्वशी की तरह,
अपने पुरुरवा से मिलने आती हो ?
मैंने भी है प्रेम किया,
पर उसने मुझसे कुछ नहीं कहा,
वो तब भी मौन थी,
वो अब भी मौन है,
नहीं जानता हूं
क्या है उसके मन में
मेरे नाम के सवाल पर चुप रहती है वो |
मुझे देख छुप रहती है वो |
मिलूंगा किसी दिन ख्याल में,
पूछूँगा उनसे सवाल मैं,
तब उनकी आंखों का मचलना भाप लूँगा,
सारे उत्तर आप लूँगा,
फिर हाथों को उनके थाम कर,
आँखों पर उनके आंखों रख कर,
उनके लबों को अपना नाम दूँगा |
ओ ! जल रानी एक विनती है तुमसे मेरी
आकर आसमान पर छा जाना
फिर घनघोर गर्जना, उन्हें डराना
सीने से मेरे लगा जाना,
बास उस पल को अमर कर जाना
है विनती तुमसे ओ! साथी
मेरे जीवन को मृदुल अमर बना जाना |
तुम तो सब देख रहीं हो
यह बता,
मेरे प्रेमिका चमक रहीं है ?
वो पानी में दमक रहीं है ?
या खिड़की पर बैठे मेरा
इंतजार कर रहीं है ?
बुरा ना मानो सच कह दूँ
तुम उनके सामने न टिक पाओगी,
उनकी रश्मि में तुम कहीं खो जाओगी,
उनकी काया की रुप देख कर,
तुम जल सी जाओगी
वो फूल की रस से मीठी है
होंठ पानी की बूँदों की तरह है
गाल तग्गङ की फूलोँ की तरह है
हृदय बारिश की बूढों की तरह है |
अरी! कहाँ जा रहीं हो ?
क्या! जल रहीं हो उनसे ?
वोभीतुम्हेंबहुतचाहतीहै ||
By Shashank Kumar Sinha

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