जरा शाम तो होने दे।
By Abhijeet Santosh Gawande
बिखरी जिल्फ़ों से तेरी युही हरदिन,
मेरे दिल का...कत्लेआम होने दे।
अभी-अभी तो बुलाने लगे है लोग मुझे तेरे नाम से,
तेरे नाम से मुझे थोड़ा और...बदनाम होने दे।
बिछड़ गया अपनो से तेरी ख़ातिर,
अब बिछड़ने नहीं दूंगा तुझको,
चाहे जो भी...अंजाम होना है, होने दे।
पिला देंगे आशिक़ी का जाम इन्ही ओंठो से,
इतनी जल्दी भी क्या है,
अरे पगली...जरा शाम तो होने दे।
By Abhijeet Santosh Gawande

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