जय महाकाल
Updated: Sep 16, 2025
By Anita Singh
दुनियां एक सागर की धारा,जीवन छोटी सी नाव है, तट से टकराकर बच जाती नैया, क्योंकि भोले खेवनहार हैं। जिस्म में जान का नाम है दीपक,जो प्रभु कृपा से जलता है, कभी हवाओं को ललकारे,कभी धूप में भी निखरता है। उसका कोई क्या कर लेगा,जिसका रक्षक ऊपरवाला, चाहे अमृत दे दो उसको, या दे दो उसे जहर का प्याला। इज़्जत शोहरत उसके हाथों में,हम सब एक खिलौने हैं, चाहे जितना लड़ना है लड़ लो,किस्मत के आगे बौने हैं। जिसको अपना बना ले भोले,उसका जीवन पार है, उसका जीवन धन्य है, जिसके भोले पालनहार हैं।
By Anita Singh

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