जब हम मिले
By Rashmi Mahish
जब हम मिले खिलखिलाने लगी समां
न तुमने कुछ कहा
न हमने कुछ कहा
फिर भी न जाने कैसे ये नया रिस्ता बना
आँखे तुम्हारी कहती थी सारी बातें
पर न मैं कुछ समझ पाई
जब सताने लगी मुझे राते
तब आँखों ने तुम्हारी नयी एहसास जगाई
कब से चुप थी जो तुम्हारी होंठ
एक ही नजर में सारी बाते कह गई
दिल भी था तुम्हारा गुमसुम
उसे भी अब खुंसियों की वजह मिल गई
इंतिजार तुम्हारा अब खत्म हुआ
पुरे हुए सरे सारा अरमान तुम्हारे
नए नए सपने दिल सजाने लगा
खुशियाँ ही खुशियाँ हो जीवन में तुम्हारे
तुम्हारी एक ही अदा जो मुझे भा गई
तुम्हारी मासूमियत मेरे दिल को लुभा गई
तुम्हारा प्यार जो मुझे पिघला गई
तुम्हारा एहसास ऐसा जो मुझमे जीने की नई उमंग जगा गई
वो दिन होगा बहुत खुशनसीब
जब हम होंगे दूसरे के करीब
फिर न होगी दुरी और तन्हाई
तब मेहरबान होगा हमपे नसीब
By Rashmi Mahish

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