जब मैं मुझसे मिला|
By Dr.Trupti Upadhyay
खुदमे खोकर जमानेको ढँढ़नेकी कोशिशमे,
वो पहले ही पल में पहचाना गया, जब मैं मुझसे मिला|
दिखाई दिया आईने में छिपा हुआ वो चहेरा,
हररोज़ देखा पर आज मिला, जब मैं मुझसे मिला|
बदल गए आंसू के बून्द गालो की चमकमे,
दर्द के साथ हसी हुई हाजिर, जब मैं मुझसे मिला|
आँखों से देखा है टूटे हुए और संजोयेकुछ ख्वाब ,
सच तो नहीं हुए फिर भी छू गए, जब मैं मुझसे मिला|
न याद रहे गमके दर्द और रही नहीं सुख की ख़ुशी,
हुई बस मस्ती ही मस्ती खुद से, जब मैं मुझसे मिला|
जित गए अल्फ़ाज़ दिलके सारे शब्दकोष के सामने,
और बिना व्याकरणके सज गए जब में मुझसे मिला|
By Dr.Trupti Upadhyay

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