जन्मदायिनी
Updated: Dec 5, 2022
By Suchita Joshi
जन्मदायिनी तू, अन्नदायिनी तू
अपार करुणा की, श्रोत है तू मां
मेरे भाग में खींची, विधाता ने जो
वो सबसे सुनहरी लकीर है तू मां ।।
जिंदगी की विषम विकट, राहों पे भी
मेरे हौसलों का अटल, बांध है तू मां
जो गम का तम, मुझे छू भी ना पाए
मेरी खुशियों का उजला प्रकाश है तू मां।।
हार के भी मैं, उठ खड़ी हूं हमेशा
जो सबसे बड़ी, मेरी जीत है तू मां
क्या चाहूंगी मैं, सोना चांदी हीरे मोती
मेरे माथे पे सुशोभित, ताज है तू मां।।
तेरे आंचल की छांव, जो मिले हमेशा
दुनियां की सबसे, अमीर हूं मैं मां
गर इंसा जनम फिर से मिले तो मैं
तेरी ही कोख से जनम लूं मैं मां ।।
By Suchita Joshi

Comments