“जज़्बात…”
By Tejash Burad
दिल के जज़्बात को अल्फ़ाज़ दे कर… उन्हें ख़त लिख देंगे,
इस मन के उस एहसास को… शत-प्रतिशत लिख देंगे,
मगर..,
जो कहने पड़े अगर जज़्बात उनसे तो ये रिश्ता कैसा,
जो समझाने पड़े मेरे एहसास उन्हें तो ये रिश्ता कैसा,
चलो उनका कहा मान कर बातें कुछ पुरानी कर लेते हैं,
थी जो यादें रूहानी कल की उससे ये शाम भी सुहानी कर लेते हैं,
मगर…
पुरानी बिसरी बातों से कैसे सँवारे आने वाला कल,
और सोच के उन बातों को कब तक ख़ुश रहें इस पल,
फिर भी तेरी हर बात पे यक़ीन है और फ़ैसले भी मंज़ूर हैं,
यूँ ही नहीं बाज़ार में हमारी मोहब्बत के क़िस्से मशहूर हैं ,
मगर…
आख़िर क्यूँ डगमगा गए तेरे फ़ैसले और क्या हुआ तेरी बातों को,
बड़ी आसानी से भूल गयी साथ बिताए हर दिन और संग गुज़री रातों को…!
By Tejash Burad

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