जंगल का राजा
By Abhishek Bagri
आंखो में अश्क हो नहीं, नयनों में सूर्यबाण रख,
माथे पे हो शिकन नहीं, तिलक जो गाता गाण रख,
जीवन में हो जितने भी गम, तू होंठ पे मुस्कान रख,
जंगल का जो राजा है तू, तो शेर सी दहाङ रख,
नल में छलकता जल नहीं, समंदर सा उफान रख,
आसमान में जो रहना है तो, सूरज सा तापमान रख,
जो भी छुए, वो ही जले, अग्नि सा तू ईमान रख,
जंगल का जो राजा है तू, तो शेर सी दहाङ रख,
नस नस में जो बूंदे बहे, तू उसमे वो उबाल रख,
मोहताज किसी का नहीं, तू खुद को यूं निढ़ाल रख,
वक्त है भिङने का अब, तैयार अपना वार रख,
जंगल का जो राजा है तू, तो शेर सी दहाङ रख,
By Abhishek Bagri

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