ज़िन्दगी का सार
By Tejash Burad
वो सपने इतने अपने होगए की नींद त्याग दी हमने,
ख्वाहिशों की छोटी सी चिंगारी को भी आग दी हमने,
और ख़्वाबो की राहों में मुसाफ़िर जैसे निकल पड़े हैं,
हालातों को परे रख कर मंज़िल की ओर चल पड़े हैं,
मुसीबतें और परेशानियों का करते कभी ज़िक्र नहीं,
प्रशंशा मिलेगी या आलोचना इसका भी फ़िक्र नहीं,
हाँ अहंकार का अंधकार हमे आज भी स्वीकार नहीं,
और मेरे अलावा मुझ पर किसी का भी अधिकार नहीं,
हमारी कोशिशों के बाद तो हम हारने को भी राज़ी हैं,
फिर खेल चाहे जिसका भी हो जीती हमने हर बाज़ी है,
हाँ ख़ुद की तलाश में ही हमने अब ख़ुद को यूँ तराशा है,
जब जब आज़माया लोगो को हमे मिली सिर्फ़ निराशा है,
मगर दुख इस बात का नहीं की वे सारे हमसे मुँह मोड़ गए,
और ना ही इस बात का की ज़रूरत के समय साथ छोड़ गए,
By Tejash Burad

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