ज़िन्दगी का सफ़र
By Rashmi Gupta
क्या साथ गया क्या जाएगा? सब यहीं पे ही रह जाएगा।
कुछ तोड़ मरोड़ के ये ज़िंदगी परखेगी तुमको ऐसे भी।
कुछ रिश्ते कच्चे होंगे पर कुछ लम्हे सच्चे होंगे भी।
कुछ रातें लंबी होंगी पर ले आएंगी सुबह वो भी।
कुछ राहें मुश्किल होंगी पर ले जाएंगी मंजिल तक भी।
कुछ मोड़ कहीं ले जाएंगे कुछ पे खो जाओगे यूं ही।
कभी रह जाओगे पीछे तो कभी बढ़ जाना तुम आगे भी।
कुछ पन्ने खाली रख लेना कुछ भरना अपने रंग से ही।
कुछ बातें दिल में रख लेना कुछ खुल के तुम यूं कह देना।
कोई समझे या ना समझे पर खुद को तुम ऐसा ही रखना।
By Rashmi Gupta

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