ज़िंदगी से मौत तक
By Bhagyashri Babanrao Ghuge
ज़िंदगी से मौत तक,
संघर्ष के असीम छोर तक…
जिस दिन हाथ मेहनत की अँगीठी में तपकर आएंगे,
उस दिन भूखा ना सोएंगे
और जिस दिन अँगीठी की आग बूझ जाएगी ,
उस दिन पानी पीकर ही भूख मर जाएगी ।
अगली सुबह फिर अंदर की आग उस अँगीठी में झोंक देंगे,
फिर हाथ अंगारों में जाकर सेकेंगे
और वही सिलसिला दोहराते रहेंगे ।
कभी पानी से तो कभी दाने से,
कभी आँसू से तो कभी आस से,
चलते रहेंगे, ज़िंदगी जीते रहेंगे,
बिना क़िस्मत पर करे शक, बस यही सिलसिले,
ज़िंदगी से मौत तक...ज़िंदगी से मौत तक...
By Bhagyashri Babanrao Ghuge

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