ज़रूरी है
Updated: Dec 5, 2022
By Hrishal Golchha
सुना था प्यार है पत्तों को शाखाओं से,
पर पतझड़ में पेड़ों का झड़ना भी ज़रूरी है,
बहुत प्यार होगा सूरज मुखी को सूरज से,
पर रात में तारों का टिमटिमाना भी ज़रूरी है,
तरसती होगी बारिश मिलने को ज़मीन से,
तरसती होगी बारिश मिलने को ज़मीन से,
पर गर्मियों में धूप का मुस्कुराना भी ज़रूरी है,
शायद यही कहना चाहा रही है क़ुदरत मुझसे,
की सच्चा हो प्यार तो फ़ासलों का आना भी ज़रूरी है।
By Hrishal Golchha

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