ज़रूरी तो नहीं
By Ashish Nagori
हर सवाल का जवाब हो......ज़रूरी तो नहीं
सब पलकों पर ख़्वाब हो ....ज़रूरी तो नहीं
जुगनू खूब चमकते हैं, स्याह अंधेरी रातों में,
हर रात मेहताब हो............ज़रूरी तो नहीं
कहने के लिए औकात हो....ज़रूरी तो नहीं
सुनने जैसे हालात हो......ज़रूरी तो नहीं
मैं यूंही कह देता हूं बात, जो आती है ज़ेहन में,
हर बात में कुछ बात हो.....ज़रूरी तो नहीं
हाथों में तेरा हाथ हो......ज़रूरी तो नहीं तू हर पल मेरे साथ हो....ज़रूरी तो नहीं मैं अक्सर बात करता हूं , तुझे छू के आई हवाओं से काबू में जज़्बात हो....... जरूरी तो नहीं दिलों में खुराफात हों.......ज़रूरी तो नहीं शहर में मारकाट हो.......ज़रूरी तो नहीं कोई बीज बो रहा है नफरतों के , एक अरसे से यहां फसल उगाने बरसात हो...ज़रूरी तो नहीं हमारे एक से खयालात हो.....ज़रूरी तो नहीं हमारी रोज मुलाक़ात हो.......ज़रूरी तो नहीं चल तू अपनी सारी चाले सोच समझ कर , सुकून से पर जिंदगी शतरंज की बिसात हो....ज़रूरी तो नहीं
By Ashish Nagori

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