ज़रा आहिस्ता चल।
By Pushpa Karn
जिंदगी के हसीं सफर पर, ए दिल! जरा आहिस्ता चल।
मुलायम मखमली सी है ख्वाहिशों की जमीं
फिसल न जाए तू कहीं, जरा आहिस्ता चल
छोटी सी है जिंदगी, पाने हैं कई मुकाम अभी
देख लूं हसरतों के मंज़र, जरा आहिस्ता चल
जिंदगी के हसीं सफ़र पर ऐ दिल ! जरा आहिस्ता चल।
कुछ टूटे हैं सपने, कुछ रूठे हैं अपने
समेट कर जोड़ लूं टूटे सपनों को, हंसाकर मना लूं रूठे अपनों को
भर लूं अपनी बांहों में खुशियों का समंदर, जरा आहिस्ता चल
जिंदगी के हसीं सफ़र पर ऐ दिल! जरा आहिस्ता चल।
दूरियां दिलों से मिटा दूं जरा, प्यार दिलों में बसा दूं जरा
नफरतों की अंधेरी राहों में,शमा प्यार की जला दूं जरा,
न हो अब हाथों में किसी के नफरतों का खंजर, जरा आहिस्ता चल
जिंदगी के हसीं सफ़र पर ऐ दिल! जरा आहिस्ता चल।
इन हंसीं वादियों को सजा लूं पलकों पर जरा,
प्यार से किसी के सजा लूं दिल का आशियां जरा,
किसी की मोहब्बत में, किसी संग मैं भी झूम लूं ज़रा
इश्क की हसीं वादियों में मैं भी जी लूं जी भर, जरा आहिस्ता चल
जिंदगी के हसीं सफ़र पर ऐ दिल! जरा आहिस्ता चल।
सांसों के कुछ कर्ज चुकाकर, जिम्मेदारियों के कुछ फर्ज निभाकर
रफ्ता रफ्ता ये जिंदगी चल पड़ी अपने सफ़र पर
क्या करना है खोने पाने की ज़िद में वक्त गंवाकर
थम जाएगी ये सांसें भी एक दिन अपने सारे फर्ज निभाकर, जरा आहिस्ता चल
जिंदगी के हंसीं सफ़र पर ऐ दिल! जरा आहिस्ता चल।
By Pushpa Karn

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