ज़मीं से रिश्ता
By Rachana Purva
अपने सपनों में उड़ान भरो !
गगन को छूने का दम अपने अन्दर रखो !
मगर धरा को अपने आप से रिहा मत करो !
अपनी गोद में सर्वस्व सँभाल लेती है वो !
उसे अकेला कभी न छोड़ना तुम !
ज़मीं से मुँह न मोड़ लेना तुम !
इतने स्वार्थी कभी न बनना तुम !
आसमाँ मे उड़ने वाले परिन्दे तुम !
इक दिन जमीं पे गिरोगें तुम !
इस बात को कभी न भूलना तुम !
चाहे जितनी भी ऊँचाई छु लो !
मगर नीची अवस्था को कभी न भूलना तुम !
By Rachana Purva

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