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ज़ख़्म दिल के

By Nalini Choudhary



पलटकर वो ज़माना अब आता नहीं

कभी हमारे लफ़्ज़ क़हर भरते थे उन पर

आज वो ख़ैर पूछने आते नहीं


अशार लिख लिख कर भी आता मनन को सुकून नहीं

ज़ख़्म दिल के कितने गहरे ही सही

पर आईने को भी हम दिखाते नहीं


By Nalini Choudhary




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